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The right frame width makes glasses feel invisible. Find yours below — it is engraved inside the temple of any pair you already own (e.g. 50 □ 22-145).
S
Narrow Fit
132–142 mm
Sunglasses for small facesM
Classic Fit
145 mm
Sunglasses for most facesL
Wide Fit
150 mm
Sunglasses for big heads & wide facesFrame width shapes how sunglasses balance your features. A small face is easily overwhelmed by standard frames, while a big head needs a wider front to sit comfortably without pressure. Our Narrow Fit frames (132–142 mm) are designed for small and petite faces, Classic Fit (145 mm) suits most face shapes, and Wide Fit (150 mm) is made for large and wide faces. Between two sizes? Our opticians adjust every frame for free in our Bali boutiques — and Handmade frames are shaped to your face in our Canggu workshop.
फ्रेम का शेप समझें
चश्मा चेहरे के नैन-नक्श को कैसे संतुलित करता है, इसमें फ्रेम की शेप की बड़ी भूमिका है। रेक्टेंगल या स्क्वायर जैसे कोणदार फ्रेम चेहरे को स्ट्रक्चर और साफ़ आकार देते हैं, खासकर नरम बनावट वाले चेहरों पर। राउंड और ओवल फ्रेम मज़बूत जॉलाइन को नरम करते हैं और ज़्यादा बहाव वाला संतुलन बनाते हैं।
ओवरसाइज़्ड फ्रेम चेहरे पर ज़्यादा मौजूदगी बनाते हैं और ध्यान आँखों की ओर खींचते हैं, जबकि पतले फ्रेम हल्का और कम दिखने वाला असर देते हैं। लेंस की ऊँचाई, फ्रेम की चौड़ाई और ब्रिज की जगह मिलकर तय करती है कि चश्मा चेहरे के अनुपात में कितना नैचुरल लगेगा।
फ्रेम चुनने में कोई सख़्त नियम नहीं है, लेकिन चेहरे की बनावट और फ्रेम की शेप के बीच कॉन्ट्रास्ट अक्सर सबसे संतुलित नतीजा देता है। मकसद यह है कि फ्रेम चेहरे पर हावी हुए बिना उसे निखारे।
फ्रेम का रंग समझें
फ्रेम का रंग तय करता है कि चश्मा स्किन टोन, रोशनी और आपके स्टाइल के साथ कैसे मिलता है। Black, Gray, Tortoise और Crystal जैसे न्यूट्रल एसीटेट टोन सबसे ज़्यादा काम के रहते हैं, क्योंकि वे अलग-अलग माहौल और कपड़ों के साथ आसानी से चल जाते हैं।
Honey, हरे या Amber एसीटेट जैसे गर्म टोन गहराई और गर्माहट जोड़ते हैं, जबकि नीले या बैंगनी जैसे ठंडे टोन कॉन्ट्रास्ट और एक साफ़ पहचान बनाते हैं। ट्रांसपेरेंट फ्रेम पसंद किए जाते हैं क्योंकि वे भारी दिखे बिना चेहरे को स्ट्रक्चर देते हैं।
रंग का चुनाव यह भी तय करता है कि रोज़मर्रा में फ्रेम कितना नज़र आता है। हल्के रंग चेहरे के टोन में घुल जाते हैं, जबकि गहरे या ज़्यादा चटख रंग आँखों के आसपास ज़्यादा साफ़ आकार बनाते हैं।
फ़िट, मटीरियल और रोज़ का आराम
शेप और रंग के अलावा, लंबे समय का आराम फ्रेम की फिटिंग से तय होता है। लेंस की चौड़ाई, ब्रिज का साइज़ और कमानी की लंबाई तय करती है कि चश्मा नाक पर कैसे बैठेगा और वज़न चेहरे पर कैसे बँटेगा। सही फिटिंग वाला फ्रेम दिनभर हिलने-डुलने पर भी टिका रहता है, न कहीं दबाव बनाता है और न फिसलता है।
मटीरियल का चुनाव भी अहम है। एसीटेट फ्रेम लचीलापन, टिकाऊपन और रंग की गहराई देते हैं, इसलिए वे नंबर वाले चश्मे और धूप के चश्मे दोनों के लिए ठीक रहते हैं। इस मटीरियल में बारीक एडजस्टमेंट मुमकिन है और स्ट्रक्चर समय के साथ स्थिर रहता है।
बाली द्वीप जैसी तेज़ रोशनी वाली जगहों पर चश्मे को तेज़ धूप और रोज़ बाहर के इस्तेमाल के हिसाब से भी बनना चाहिए। फ्रेम का डिज़ाइन, रंग और लेंस मिलकर ऐसा चश्मा बनाते हैं जो दिनभर आरामदायक, काम का और देखने में संतुलित रहे।





















