छोटा चेहरा क्या होता है?
छोटा चेहरा होने का मतलब हमेशा बहुत पतला या छोटा चेहरा नहीं होता। आम तौर पर चेहरा तब छोटा माना जाता है जब सिर के दोनों किनारों के बीच की दूरी औसत से कम हो और आम फ्रेम पहनने पर बहुत चौड़े लगें।
इसे पहचानने के कुछ आसान संकेत हैं: कमानियाँ किनारों से बहुत बाहर निकली दिखती हैं, चश्मा नाक से नीचे खिसकता है, या लेंस चेहरे के मुकाबले बहुत बड़े लगते हैं। ऐसे में दिक्कत फ्रेम के स्टाइल में नहीं, बस उसके साइज़ में होती है।
संकरे या हल्के फ्रेम चुनने से आराम और बैलेंस तुरंत बेहतर हो जाता है।
छोटे चेहरे के लिए सही चश्मे
छोटे चेहरे पर आम तौर पर वही फ्रेम अच्छे लगते हैं जो अनुपात में और हल्के हों। बहुत चौड़े या बहुत मोटे फ्रेम जल्दी ही ओवरसाइज़्ड दिखने लगते हैं, जबकि पतले फ्रेम चेहरे के साथ कुदरती तरीके से घुल जाते हैं।
छोटे राउंड फ्रेम, पतले रेक्टेंगल शेप और हल्के मेटल फ्रेम अक्सर अच्छे विकल्प रहते हैं। एसीटेट फ्रेम भी ठीक चलते हैं, बशर्ते वे बहुत मोटे या बहुत चौड़े न हों।
धूप के चश्मे में भी यही बात लागू होती है: थोड़े छोटे लेंस और चेहरे की चौड़ाई के हिसाब के फ्रेम ज़्यादा संतुलित दिखते हैं। मकसद चश्मे को छिपाना नहीं, बल्कि फ्रेम और चेहरे के अनुपात के बीच तालमेल रखना है।
आम तौर पर जो फ्रेम चेहरे के किनारों से बाहर नहीं निकलते और चेहरे के साथ सही बैठते हैं, वे पहनने में ज़्यादा आरामदायक और नैचुरल लगते हैं।
आराम और फ़िट
आराम सिर्फ फ्रेम के साइज़ पर नहीं, सही एडजस्टमेंट पर भी टिका होता है। छोटे चेहरे पर नाक का ब्रिज और कमानियाँ चश्मे को टिकाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
सही फ़िट वाला फ्रेम नाक पर नैचुरली टिकना चाहिए, बिना निशान छोड़े और बिना खिसके। कमानियाँ सिर के आकार के साथ चलें और चश्मे को हल्के से थामें, कानों के पीछे दबाव बनाए बिना।
छोटे एडजस्टमेंट बड़ा फर्क लाते हैं। नोज़ पैड ठीक करना, कमानियों को थोड़ा कसना या फ्रेम का घुमाव बदलना आराम जल्दी बेहतर कर देता है।
इसीलिए स्टोर पर एडजस्टमेंट ज़रूरी रहता है, खासकर तब जब फ्रेम का साइज़ पहले से करीब-करीब सही हो।
चश्मे खुद पहनकर देखना
फ्रेम का साइज़ और शेप सही लगने पर भी, आराम और अनुपात जाँचने का सही तरीका चश्मा खुद पहनकर देखना ही है। हर चेहरा अलग होता है, और एक जैसे माप वाले दो फ्रेम पहनने पर बहुत अलग लग सकते हैं।
छोटे चेहरों के लिए सही चश्मा चुनने का मतलब ज़्यादातर बैलेंस और आराम है। संकरे, हल्के और ठीक से फ़िट किए गए फ्रेम ज़्यादा नैचुरल और आरामदायक नतीजा देते हैं। स्टोर पर छोटे एडजस्टमेंट भी रोज़ की पकड़ में असली फर्क लाते हैं।
सही फ्रेम के साथ पावर वाला चश्मा हो या धूप का चश्मा, वह चेहरे का हिस्सा ही लगता है।






