प्रोग्रेसिव लेंस क्या होता है?
प्रोग्रेसिव लेंस एक पावर वाला लेंस है जिसमें एक ही सतह पर कई करेक्शन होते हैं, बिना ज़ोन के बीच दिखने वाली लाइन के। लेंस का ऊपरी हिस्सा दूर की नज़र के लिए, बीच का हिस्सा मध्यम दूरी के लिए और निचला हिस्सा पास की नज़र के लिए होता है।
लेंस की पावर ऊपर से नीचे धीरे-धीरे बदलती है, जिससे अलग-अलग दूरियों के बीच बदलाव सहज रहता है। इस डिज़ाइन में बाइफोकल लेंस वाली दिखने वाली लाइन नहीं होती।
इसलिए प्रोग्रेसिव लेंस रोज़ के कामों में — जैसे ड्राइविंग, कंप्यूटर पर काम या पढ़ना — ज़्यादा नैचुरल नज़र देते हैं।
प्रोग्रेसिव लेंस किसके लिए हैं?
प्रोग्रेसिव लेंस मुख्य रूप से प्रेस्बायोपिया वालों के लिए बने हैं, जो आमतौर पर चालीस की उम्र के आसपास शुरू होता है। समय के साथ आँख का नैचुरल लेंस पास की चीज़ों पर फोकस करने की क्षमता खो देता है, जिससे पढ़ना या फोन इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।
ये लेंस उन लोगों के लिए खास काम के हैं जो दूर और पास के लिए अलग-अलग चश्मे बदलना नहीं चाहते। एक ही चश्मे से रोज़ के ज़्यादातर काम हो जाते हैं।
इन्हें पावर वाले चश्मों में और कुछ पावर वाले धूप के चश्मों में भी लगाया जा सकता है।
निष्कर्ष
प्रोग्रेसिव लेंस एक ही चश्मे से हर दूरी पर नज़र ठीक करते हैं। लेंस की सतह पर पावर धीरे-धीरे बदलती है, जिससे दूर, बीच और पास की नज़र के बीच बदलाव सहज रहता है।
शुरुआत में थोड़ा अभ्यस्त होने का समय सामान्य है, लेकिन ज़्यादातर लोगों को प्रोग्रेसिव लेंस जल्दी आरामदायक लगने लगते हैं। प्रेस्बायोपिया के लिए ये रोज़मर्रा में काम का और बाहर से न दिखने वाला हल हैं।
सही फिटिंग और सही सेंटरिंग के साथ ये रोज़ के कामों के लिए नैचुरल नज़र देते हैं।






