फोटोक्रोमिक लेंस कैसे काम करते हैं
फोटोक्रोमिक लेंस में UV के प्रति संवेदनशील अणु होते हैं। सूरज की अल्ट्रावायलेट रोशनी पड़ने पर इन अणुओं की बनावट बदल जाती है और लेंस गहरा हो जाता है। UV कम होते ही लेंस धीरे-धीरे फिर क्लियर हो जाते हैं।
यह प्रक्रिया पूरी तरह अपने आप होती है और पलटने वाली है। यह दिखने वाली रोशनी से नहीं, मुख्य रूप से UV से चलती है, इसीलिए तेज़ रोशनी वाले कमरों में भी लेंस क्लियर रहते हैं।
गहरा होने और वापस क्लियर होने की रफ़्तार तापमान, UV की तीव्रता और लेंस तकनीक पर निर्भर करती है।
फोटोक्रोमिक लेंस के फ़ायदे क्या हैं?
फोटोक्रोमिक लेंस का सबसे बड़ा फ़ायदा इनकी बहुउपयोगिता है। एक ही चश्मा अंदर और बाहर, दोनों जगह काम आता है, बिना पावर वाले चश्मे और धूप के चश्मे के बीच बदले।
ये UV सुरक्षा भी देते हैं, जिससे लंबे समय तक धूप में रहने पर आँखों की हिफ़ाज़त होती है। लेंस का टिंट बदलती रोशनी के हिसाब से अपने आप एडजस्ट होता है, जिससे अलग-अलग माहौल में आराम बढ़ता है।
जो लोग बार-बार अंदर-बाहर आते-जाते हैं, उनके लिए फोटोक्रोमिक लेंस चश्मा पहनना आसान और सुविधाजनक बना देते हैं।






